कौनसे भ्रम में हो बाबू ट्रांसजेंडर लोग भी रक्षाबंधन मानते हैं

Transgender Celebrated Rakshabandhan Festival

“भईया मेरे राखी के बंधन को निभाना, राखी आने पर हर बहिन का भाई को पैगाम होता है”

रक्षाबंधन भाई-बहिन के रिश्ते का पर्व होता है जहाँ भाई अपनी बहिन को उसकी सुरक्षा और सारी ज़रूरतों को पूरा करने का वादा करता है. हिन्दू धर्म में इसके बहुत मायने हैं लेकिन अन्य धर्मों में भी भाई द्वारा अपनी बहिन को इस तरह रिश्ते को समर्पित किया जाने वाला भाव दिखाया ही जाता है.

Transgender Celebrated Rakshabandhan Festival
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चूँकि राखी का त्यौहार किसी मर्द, औरत या लड़का लड़की जिसको हम सामाजिक तौर पर भाई या बहिन बोलकर पहचानते हैं. अगर आप भाई बहिन जैसा शुद्ध लिंग ना रखो तो क्या हो मतलब कहा जाये ना तो पूरी तरह लड़का या ना पूरी तरह लड़की. ना नर ना ही मादा.

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जिनको हम्रेर समाज में ट्रांसजेंडर कहा जाता है और भी देसी भाषा का इस्तेमाल किया जाये तो कह सकते हैं हिंजड़ा. बाकि आप उनको अपनी सहूलियत के हिसाब से और भी नाम से पुकारते हैं वो क्या करें. वो ना तो लड़का होते और ना ही लड़की तो कौन किसको राखी बांधे ये समझ से बाहर है.

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अक्सर यही सवाल उठ खड़ा होता है की क्या हिंजड़ा, रक्षाबंधन का उत्सव मनाते हैं तो उसका जवाब है हाँ. ये त्यौहार जन्माष्टमी पर अच्छे से मनाया जाता है लेकिन त्यौहार का दिन होने के कारण श्रावण महिने की पूर्णिमा को हम भाईयों को राखी बांधते हैं. किन्नर शुरू से ही अपनी फैमिली से दूर रहते हैं क्यों कि उनकी फैमिली ही उनको इस समुदाय में भेज कर उनसे रिश्ता तोड़ लेती है. किन्नरों की मान्यता है कि- “ये अपने यार को छोड़ सकता है, लेकिन बनाए हुए भाई को कभी नहीं छोड़ता.”

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चूँकि बात इतनी ही स्पष्ट है की किसी एक वर्ग का किन्हीं अपूर्णताओं के कारण किसी उत्सव से वंचित रखा जाये ये उचित नहीं और किन्नरों द्वारा मनाये जाने वाला ये रक्षाबंधन इसी उदासीन भावना को खत्म करने का पर्याय बना है.

आगे सफ़र जारी रखें, आखिर कुछ ‘स्पेशल’ तो बनता है –

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आख़िर मालूम चल ही गया ये डॉक्टर लोग इतना सूगला कैसे लिखते हैं ? जवाब निराश करने वाला है.

 

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